सिद्धार्थनगर: मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स का फूटा गुस्सा, ‘काला कानून’ वापस लेने के लिए डीएम को सौंपा ज्ञापन

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन के बैनर तले आज दवा प्रतिनिधियों और सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों और नियोक्ताओं के शोषण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

सिद्धार्थनगर  उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन के बैनर तले आज दवा प्रतिनिधियों और सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों और नियोक्ताओं के शोषण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष अरुण कुमार पाठक के नेतृत्व में भारी संख्या में कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और सरकार से ‘काले कानूनों’ को तत्काल वापस लेने की मांग की।

शोषण और ‘ट्रैकिंग’ के खिलाफ उठाई आवाज

जिला अध्यक्ष अरुण पाठक ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि सेल्स प्रमोशन कर्मचारी आज दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ केंद्र सरकार श्रम कानूनों में बदलाव कर कर्मचारियों के अधिकारों को खत्म कर रही है, तो दूसरी तरफ कंपनियां अवैध तरीके से कर्मचारियों का स्थानांतरण (Transfer) और बर्खास्ती कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के माध्यम से कर्मचारियों की निगरानी (Tracking) कर उनकी निजता का उल्लंघन किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

प्रमुख 20 सूत्रीय मांगें: न्यूनतम वेतन ₹26,910 की मांग
एसोसिएशन ने सरकार के सामने 20 सूत्रीय चार्टर रखा है, जिनमें मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं

श्रम कानून: चार नई श्रम संहिताओं को रद्द कर ‘बिक्री संवर्धन कर्मचारी अधिनियम 1976’ को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

वेतन व पेंशन: सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,910 और पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम ₹9,000 मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।

कार्य अवधि: 8 घंटे का कार्य दिवस घोषित हो और कार्य घंटे बढ़ाने वाले संशोधनों को निरस्त किया जाए।

भत्ता वृद्धि: बढ़ते ईंधन और महंगाई को देखते हुए दैनिक और यात्रा भत्तों में तत्काल बढ़ोतरी का आदेश दिया जाए।

जीएसटी मुक्त दवाएं: जनहित में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर GST शून्य की जाए और स्वास्थ्य बजट को GDP का 5% तक बढ़ाया जाए।

ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक: ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के उल्लंघन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे को देखते हुए दवाओं की ऑनलाइन बिक्री बंद की जाए।

उत्पीड़न और पुलिसिया कार्रवाई का विरोध

यूनियन नेताओं ने नाराजगी जताई कि कई प्रबंधन पुलिस के साथ मिलीभगत कर ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं। अस्पतालों और संस्थानों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स के प्रवेश पर प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि दवा प्रतिनिधियों के काम को ‘आपराधिक कृत्य’ मानना बंद किया जाए।

भ्रष्टाचार रोकने के लिए वैधानिक कोड की मांग

अरुण पाठक ने जोर देकर कहा कि दवा क्षेत्र में कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार को रोकने के लिए दंड के प्रावधान के साथ ‘विपणन का वैधानिक कोड’ तैयार किया जाना चाहिए। वर्तमान बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली को बदलकर लागत-आधारित प्रणाली पर वापस लौटने की मांग की गई है ताकि आम जनता को सस्ती दवाएं मिल सकें।

इस मौके पर जिले के तमाम सेल्स प्रमोशन कर्मचारी उपस्थित रहे और चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो संगठन आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होगा।

 

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