संसद में गूंजी सिद्धार्थनगर की आवाज: जगदंबिका पाल ने श्रम सुधारों और ककरहवा बॉर्डर का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली

नई दिल्ली लोकसभा में सांसद जगदंबिका पाल ने राष्ट्रहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात मजबूती से रखी। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

नई दिल्ली लोकसभा में सांसद जगदंबिका पाल ने राष्ट्रहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात मजबूती से रखी। उन्होंने Industrial Relations Code (Amendment) Bill, 2026 का समर्थन करते हुए इसे श्रम कानूनों में स्थिरता और भरोसे का नया अध्याय बताया।

पाल ने सदन को अवगत कराया कि नवंबर 2025 से लागू श्रम संहिताओं के कारण रोजगार परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि टियर-II और III शहरों में जॉब पोस्टिंग में 56% की वृद्धि हुई है और महिला रोजगार भी 10% बढ़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 29 पुराने कानूनों को एकीकृत कर बनाया गया यह आधुनिक ढांचा श्रमिक सुरक्षा और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

ककरहवा बॉर्डर पर इमिग्रेशन सुविधा की मांग

संसदीय नियम 377 के तहत पाल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र सिद्धार्थनगर की ककरहवा सीमा चौकी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यहाँ केवल कस्टम संचालन होता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और व्यापारियों को कठिनाई होती है।

सांसद की प्रमुख मांगें

ककरहवा सीमा को पूर्ण इमिग्रेशन एंट्री प्वाइंट के रूप में विकसित किया जाए।

भारी वाहनों, यात्री बसों और वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों के आवागमन की अनुमति दी जाए।

पाल ने जोर देकर कहा कि सिद्धार्थनगर एक आकांक्षी जिला है। लुंबिनी (नेपाल) आने वाले पर्यटकों के लिए इस मार्ग के खुलने से क्षेत्र में पर्यटन, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इन जनहितकारी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया।

 

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