परतावल: कागजों पर धधक रहे अलाव, जमीन पर ठिठुर रहे लोग; ठंड से राहत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

महराजगंज

महराजगंज जनपद में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है, लेकिन नगर पंचायत परतावल में प्रशासन द्वारा किए गए राहत के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है, लेकिन नगर पंचायत परतावल में प्रशासन द्वारा किए गए राहत के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। कड़ाके की इस ठंड में जहाँ आम जनमानस का बुरा हाल है, वहीं नगर पंचायत प्रशासन अलाव के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है।

अधजली लकड़ियां बयां कर रही हकीकत नगर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों की जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों से बिल्कुल उलट है। कई स्थानों पर अलाव के नाम पर केवल थोड़ी-सी राख और अधजली लकड़ियां ही दिखाई दे रही हैं, जो औपचारिकता की कहानी स्वयं बयां कर रही हैं। सार्वजनिक स्थलों, मुख्य बाजारों और चौराहों पर या तो अलाव जलाए ही नहीं जा रहे, और यदि कहीं जलते भी हैं तो नाममात्र की लकड़ियाँ डाली जाती हैं, जो कुछ ही मिनटों में बुझ जाती हैं।

जिम्मेदारों की अनदेखी से जनता में आक्रोश स्थानीय नागरिकों, मजदूरों और राहगीरों का कहना है कि भीषण ठंड और गलन के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि चैन की नींद सो रहे हैं, जबकि गरीब और बेसहारा लोग खुले आसमान के नीचे ठिठुरने को मजबूर हैं। लोगों का आरोप है कि अलाव की व्यवस्था केवल सरकारी फाइलों और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है।

जनता ने उठाई प्रभावी कार्रवाई की मांग नगरवासियों में बढ़ते रोष के बीच अब प्रशासन से यह मांग की जा रही है कि ठंड से बचाव के लिए केवल खानापूर्ति न की जाए, बल्कि वास्तविक रूप से पर्याप्त लकड़ियों की व्यवस्था कर नियमित अलाव जलवाए जाएं। सवाल यह खड़ा होता है कि क्या जिम्मेदार अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर आम जनता को इस हाड़ कंपाने वाली ठंड से निजात दिलाएंगे, या फिर राहत की यह ‘अग्निशिखा’ केवल कागजों में ही जलती रहेगी?

 

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