ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की जेलों में अब जाति आधारित भेदभाव समाप्त होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जेल मैनुअल में प्रथम संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश की जेलों में अब जाति आधारित भेदभाव समाप्त होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जेल मैनुअल में प्रथम संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत, अब बंदियों के अभिलेखों और वारंटों से जाति का कॉलम हटाया जाएगा।
यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है, जिसने ‘सुकन्या शांथा बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले में जेल मैनुअल में बदलाव का निर्देश दिया था। कोर्ट ने संज्ञान लिया था कि कई राज्यों के मैनुअल में अभी भी ऐसे प्रावधान हैं जो कैदी वर्गीकरण, श्रम आवंटन और अनुशासन में जाति-आधारित विभाजन को बढ़ावा देते हैं।
नए नियम और बदलाव
जेलों में बंदियों से अब जाति देखकर काम नहीं लिया जाएगा।
कैदियों का वर्गीकरण, कार्य आवंटन और सजा में छूट से संबंधित नीतियां अब केवल वस्तुनिष्ठ, विधिसम्मत और सुधारात्मक मानकों पर आधारित होंगी।
कैबिनेट ने सुनिश्चित किया है कि जेल की व्यवस्था संविधान में निहित समानता, गरिमा और भेदभाव-रहितता के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
अभी तक जेलों में सफाई, रसोई, कृषि, बागवानी और कारखानों में उत्पादन जैसे कई काम होते हैं। सूत्रों के अनुसार, पहले सफाई कार्य करने वाले अनुसूचित जाति के बंदियों को अधिक पारिश्रमिक और सजा में छूट मिलती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त होगी।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) December 3, 2025























