ठूठीबारी:टूटी नालियां और सड़कें बनी ठूठीबारी ग्रामसभा की पहचान,विकास के दावों की खुली पोल

महराजगंज

इंडो-नेपाल सीमा से सटा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र, महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील का उपनगर ठूठीबारी, आज टूटी नालियों और जर्जर सड़कों की पहचान बन गया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट 

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इंडो-नेपाल सीमा से सटा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र, महराजगंज जनपद के निचलौल तहसील का उपनगर ठूठीबारी, आज टूटी नालियों और जर्जर सड़कों की पहचान बन गया है। यह वह क्षेत्र है जहां नेपाल से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं, लेकिन खराब बुनियादी ढांचा यहां के आर्थिक विकास को भी प्रभावित कर रहा है।

माना जाता है कि जहां सड़कें अच्छी और विकसित होती हैं, वहां विकास तेजी से होता है। हालांकि, ठूठीबारी ग्रामसभा, जो कि ठूठीबारी सहित मरचहवां, अराजी बैरिया, सड़कहवा और धरमौली जैसे लगभग पांच घनी आबादी वाले गाँवों का समूह है, यहां की सड़कें और नालियां विकास के दावों की पोल खोल रही हैं। ग्रामसभा को सरकार की तरफ से विकास के लिए पर्याप्त धनराशि भी मिलती है, लेकिन वह कहाँ “गमन” हो जाती है, इसका कोई हिसाब नहीं है।

खस्ताहाल सड़कें और खुली नालियां बनी मुसीबत

ठूठीबारी की सबसे गंभीर समस्या एसबीआई रोड पर स्थित लक्ष्मी नगर मुहल्ले में देखी जा सकती है। यहां नालियां सड़क के बीचोबीच बनाकर वैसे ही खुली छोड़ दी गई हैं। इन नालियों का पानी नालियों में न बहकर सड़कों पर बहता है, जिससे राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो गया है। रात के अंधेरे में इस रास्ते से गुजरना दुर्घटनाओं को दावत देने जैसा है।

स्थानीय निवासियों की आपबीती

स्थानीय निवासी गोपाल चौहान, सुरेश प्रसाद रौनियार, राम प्रकाश प्रजापति, आलोक गुप्ता, अमित निगम, महेंद्र चौहान, सन्नी रौनियार, कुलदीप निगम और श्याम मिलन यादव सहित कई लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान को आवेदन भी दिया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। खुली नालियों से लगातार दुर्गंध आती है और मच्छरों का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि खुले में बैठना भी दूभर हो गया है। इन खुली नालियों का गंदा पानी आसपास के जलस्रोतों को भी प्रदूषित कर रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं। आए दिन राहगीर इन खराब रास्तों के कारण चोटिल होते रहते हैं।

उच्चाधिकारियों से भी नहीं मिली मदद

इस संबंध में स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या आश्वासन नहीं मिल पाया है।

अब सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी लापरवाही का आखिर जिम्मेदार कौन है? कब ठूठीबारी ग्रामसभा को इस बदहाली से मुक्ति मिलेगी और यहां के नागरिकों को एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल पाएगा?

 

 

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