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22Mar2023 21:47PM
लेहड़ा
लेहड़ा देवी मन्दिर जनपद का प्रसिद्द शक्तिपीठ है पूर्वी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों की आस्था एवं विश्ववास का केन्द्र है।
माना जाता है कि सच्चे मन से मांगी गयी यहां हर मुराद पूरी होती है।
लेहड़ा दुर्गामन्दिर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व है।माता आद्रवनवासिनी शक्तिपीठ लेहड़ा दुर्गा मन्दिर को महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि पाडण्वों ने अपने अज्ञातवास के दौरान काफी समय यहीं व्यतीत किया था। पाण्डु पुत्र भीम द्वारा मन्दिर में स्थित पिण्डी की स्थापना की गयी थी। पाण्डवों ने यहाँ जगत जननी माँ जगदम्बे की उपासना और अराधना की थी।
गुप्त काल में भारत भ्रमण पर आए चीनी यात्री ह्वेंनसांग ने भी अपने यात्रा वृतांत में भारत प्रवास के दौरान इस मन्दिर के बारे में लिखा है।
अन्य पौराणिक कथाओं के आधार पर भी कहा जाता है कि किसी समय यहाँ से होकर पवह नदी बहा करती थी आज भी वह पवह नाले के रूप में मन्दिर के पीछे मौजूद है।

नाविक को दिए थे सुंदर कन्या के रूप में दर्शन|
किंवदंती है कि एक बार देवी सुन्दर कन्या के रूप में नाव से नदी को पार कर रही थीं। उनकी सुन्दरता देखकर नाविक के मन में दुर्भावना आ गई और उसने मां को छूने का प्रयास किया। उसी समय देवी अपने विलक्षणरूप में आ गई। यह देख नाविक घबराकर उनके पैरो में गिर गया और क्षमा याचना करने लगा।
मां को दया आ गई और उन्होंने नाविक को वरदान दिया कि जब भी श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आद्रवन शक्तिपीठ आएंगे तो नाविक को भी याद करेंगे। मन्दिर के पूरब दिशा में एक नाव पर देवी की प्रतिमा मौजूद है। मन्दिर का मुख्य प्रसाद नारियल व चुनरी है।

मन्दिर के महन्थ देवीदत्त पाण्डेय ने बताया कि मन्दिर के अंदर दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने का पूरा प्रबन्ध किया गया है उनके लिए भंडार गृह में भोजन करने का भी व्यवस्था है।























