गोरखपुर

गोरखपुर जनपद के निर्वाचन आयोग के निर्देश पर गोरखपुर में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण के बाद सत्यापन प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया गया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

गोरखपुर जनपद के निर्वाचन आयोग के निर्देश पर गोरखपुर में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण के बाद सत्यापन प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया गया है। 10 अप्रैल को प्रकाशित अंतिम वोटर लिस्ट से जिन मतदाताओं के नाम छूट गए थे या कट गए थे, उनका अब दोबारा बूथ स्तर पर सत्यापन किया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत बीएलओ घर-घर जाकर छूटे हुए मतदाताओं की वर्तमान स्थिति की जांच करेंगे।
क्या है पूरा मामला
SIR से पहले 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित हुई सूची और SIR के बाद की सूची का मिलान किया जा रहा है। पुरानी सूची में शामिल जो नाम नई सूची में नहीं हैं, उनकी संख्या लगभग 6 लाख 45 हजार है। ऐसे सभी मतदाताओं की सूची बूथ लेवल अधिकारियों को सौंप दी गई है। सत्यापन के दौरान जो वैध मतदाता मिलेंगे, उनसे नया फॉर्म-6 भरवाया जाएगा।
गोरखपुर में SIR से पहले 36.66 लाख से अधिक मतदाता दर्ज थे, लेकिन इस प्रक्रिया के बाद नाम हटने से यह संख्या घटकर 30,20,908 रह गई। पहले सूची से नाम हटने का एक बड़ा कारण 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जरूरी दस्तावेज या पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध न करा पाना था। हालांकि, अब इस अतिरिक्त बाध्यता के हटने से उन नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जो पुराने रिकॉर्ड न मिलने के कारण आवेदन प्रक्रिया में अटक रहे थे।
चिल्लूपार में कटे हैं सर्वाधिक नाम
विधानसभा वार आंकड़ों के अनुसार, चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 87,732 नाम कटे हैं। इसके अलावा बांसगांव में 83,062, खजनी में 83,014, गोरखपुर ग्रामीण में 70,763, कैंपियरगंज में 68,242, चौरी चौरा में 67,355, पिपराइच में 62,175, गोरखपुर शहर में 62,152 और सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में 61,130 नाम हटे हैं।
विशेष शिविरों का होगा आयोजन
प्रशासन की ओर से यह अभियान केवल घर-घर सत्यापन तक ही सीमित नहीं रहेगा। शिक्षण संस्थानों, जनसंपर्क अभियानों, स्वीप गतिविधियों और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए लोगों को नाम जुड़वाने की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा रात्रि आश्रयों, श्रमिक बस्तियों, बेघर और समाज की मुख्यधारा से दूर रह रहे लोगों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे। जिला निर्वाचन अधिकारी इस पूरे अभियान की नियमित समीक्षा और कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
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