शिकारपुर सीएचसी में बदहाली: इमरजेंसी से डॉक्टर नदारद, मरीजों को बाहर की दवा और जांच के लिए किया जा रहा मजबूर

बुलंदशहर

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच बुलंदशहर जनपद के शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिकारपुर से एक गंभीर मामला सामने आया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच बुलंदशहर जनपद के शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिकारपुर से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ आने वाले गरीब मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बदहाली का आलम यह है कि इमरजेंसी वार्ड से भी डॉक्टर नदारद मिल रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में है।

कमीशन का खेल: विशेष मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं दवाइयां

अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों का आरोप है कि डॉक्टर सरकारी पर्चे पर ऐसी दवाइयां लिख रहे हैं जो अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध नहीं होतीं। चौंकाने वाली बात यह है कि मरीजों के अनुसार, डॉक्टरों द्वारा लिखी गई ये दवाइयां अस्पताल के ठीक सामने स्थित एक विशेष निजी मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। इससे डॉक्टरों और निजी मेडिकल संचालकों के बीच साठ-गांठ की आशंका जताई जा रही है।

जांच सुविधा होने के बावजूद निजी लैब का सहारा

सीएचसी में पैथोलॉजी और जांच की सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद मरीजों को अल्ट्रासाउंड और खून की जांचों के लिए निजी लैब में भेजा जा रहा है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब मरीजों पर इसका भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मंगलवार को जब न्यूज़ टीम ने अस्पताल का मुआयना किया, तो इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली और मरीज इलाज के लिए भटकते नजर आए।

अभद्रता और लापरवाही के आरोप

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में तैनात कुछ डॉक्टर नियमित ड्यूटी पर नहीं आते और ओपीडी के समय भी नदारद रहते हैं। यदि कोई मरीज या तीमारदार इस अव्यवस्था पर सवाल उठाता है, तो कुछ डॉक्टरों द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ढिलाई के कारण ही डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं।

कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी बुलंदशहर और सीएचसी प्रभारी से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर भ्रष्ट और लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।

 

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