ममता का अनूठा झूला: अयोध्या की विमला की संघर्ष गाथा; पति के चोटिल होने पर खुद संभाली घर की कमान, 1 साल की बच्ची को झूले में लेकर जाती हैं काम पर

अयोध्या

अयोध्या धर्मनगरी अयोध्या से मां की ममता और अटूट संघर्ष की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल दिल को छू लेती है बल्कि मजबूरियों के बीच पल रहे साहस की भी कहानी कहती है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

अयोध्या धर्मनगरी अयोध्या से मां की ममता और अटूट संघर्ष की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल दिल को छू लेती है बल्कि मजबूरियों के बीच पल रहे साहस की भी कहानी कहती है। जहाँ लोग बच्चों को गोद में लेकर चलने में भी थक जाते हैं, वहीं विमला नाम की महिला अपनी एक साल की मासूम बेटी को ‘झूले’ में लेकर घर-घर काम करने निकलती हैं।

मजबूरी ने बनाया मजबूत: पति के घायल होने पर आया संकट

विमला की जिंदगी में संघर्ष का दौर तब शुरू हुआ जब 23 अगस्त 2024 को उनके पति एक हादसे में चोटिल हो गए। पति के चेन्नई में रहने और घायल होने के कारण घर की पूरी जिम्मेदारी विमला के कंधों पर आ गई। अपने पति का इलाज और परिवार का पेट पालने के लिए विमला ने दूसरों के घरों में साफ-सफाई का काम शुरू किया।

गोद के बजाय झूला क्यों

विमला ने बताया कि उनकी मासूम बेटी इतनी समझदार है कि वह अपनी माँ को परेशान नहीं करना चाहती। विमला के अनुसार

धूप बहुत तेज होती है और बच्ची पैदल चल नहीं सकती। वह मेरी गोदी में इसलिए नहीं आती क्योंकि उसे लगता है कि उसकी मम्मी को परेशानी होगी। इसलिए वह पिछले एक साल से मेरे साथ इसी तरह झूले में बैठकर सफर कर रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

इस मां-बेटी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विमला एक हाथ में बच्ची का झूला थामे और दूसरे हाथ से अपनी मेहनत की राह चुनती नजर आ रही हैं। यह दृश्य एक तरफ मां की ममता और अटूट संघर्ष को दिखाता है, तो दूसरी तरफ समाज और सिस्टम के सामने यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या ऐसे मेहनतकश परिवारों तक सरकारी योजनाओं की मदद पहुँच पा रही है?

मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली विमला फिलहाल अयोध्या के फतेहगंज (मायका) क्षेत्र में रहकर अपनी गृहस्थी और बच्ची के भविष्य को संवारने के लिए हर दिन कड़ी धूप में पसीना बहा रही हैं।

 

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