बलिया: तिरंगे में लिपटा जब घर पहुँचा लाल, तो फूट-फूटकर रो पड़ा प्रधानपुर; नम आँखों से वीर जवान को दी गई अंतिम विदाई

बलिया

बलिया जनपद के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र स्थित प्रधानपुर गांव में सोमवार की शाम उस वक्त कोहराम मच गया, जब भारतीय सेना के वीर जवान रणजीत यादव का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ उनके पैतृक निवास पहुँचा। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बलिया जनपद के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र स्थित प्रधानपुर गांव में सोमवार की शाम उस वक्त कोहराम मच गया, जब भारतीय सेना के वीर जवान रणजीत यादव का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ उनके पैतृक निवास पहुँचा। वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर आँख नम दिखी। भारत माता के जयकारों के बीच पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।

कर्तव्य पथ पर समर्पित रहा जीवन

स्व. रामप्रकाश यादव के पुत्र रणजीत यादव वर्ष 2013 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनकी पहली तैनाती कुमाऊँ रेजिमेंट के तहत जम्मू-कश्मीर के दुर्गम लद्दाख बॉर्डर पर हुई थी। लगभग तीन-चार वर्ष पूर्व ड्यूटी के दौरान वे अचानक बीमार पड़ गए थे, जिसके बाद उनका उपचार लखनऊ में चल रहा था। स्वास्थ्य में सुधार के बावजूद रविवार की रात्रि उन्होंने अंतिम सांस ली।

परिजनों का करुण क्रंदन, मासूम की मायूसी ने सबको झकझोरा

जैसे ही सेना के वाहन से पार्थिव शरीर गांव पहुँचा, माता मेवावती देवी और पत्नी पूजा यादव के विलाप से पत्थर दिल भी पसीज गए। सबसे अधिक मर्माहत करने वाला दृश्य शहीद जवान के तीन वर्षीय पुत्र राजभूषण की मासूमियत और मायूसी थी, जिसे देख वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप उठी।

‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ तमसा तट पर अंतिम संस्कार

सेना की टुकड़ी द्वारा वीर जवान को पूरे सैन्य सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ की सलामी दी गई। इसके बाद निकली शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या में नागरिक शामिल हुए, जो “जब तक सूरज चाँद रहेगा, रणजीत तेरा नाम रहेगा” के नारे लगा रहे थे। शहीद रणजीत यादव का अंतिम संस्कार प्रधानपुर स्थित तमसा नदी के तट पर राजकीय सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

 

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