दीवाली में सभी के घरों में जले देशी चिराग,कुम्हार भाई बना रहे उम्मीदों के दीये,चाक की रफ्तार हुई तेज

Voice Of News 24

10 Oct 2023 00:41PM

कुम्हारों के चाक की रफ्तार हुई तेज,बड़ी संख्या में बन रहे दिवाली के दीये,अच्छी कमाई की उम्मीद से रौशन होगा इनका भी आँगन

कुम्हार भाई और आगामी दिवाली की खास बातचीत के जरिये स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की मुहीम में हमारे विशेष संवाददाता अरुन पटेल की खास रिपोर्ट

गोरखपुर

दीपावली के पर्व को कुछ ही दिन शेष है।ऐसे में हर जिले,कस्बों और गाँवो के कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। कुम्हार मिट्टी के आकर्षक दिए,खिलौने बनाने में जुट गए है। जिले के कुम्हारों के हाथ चाक पर तेजी से चल रहे है और वह मिट्टी के दिए, खिलौने, गुल्लक, गुड्डा-गुड़िया, हाथी घोड़े को आकर्षक तरीके से बनाने मे जुट गए हैं।

दिवाली का यह पर्व दीपों का त्यौहार माना जाता है।जहां दीपक कि रोशनी के साथ सुख और समृद्धि की लोग कामना करते हैं।इसी को लेकर लोग अपने-अपने घरों में दीपावली मनाने की तैयारी में जहां जुटे हैं। वहीं कुम्हार दीपक और पूजा-पाठ के लिए मिट्टी का कलश, खिलौने आदि बनाने में भी रात-दिन एक किए हुए हैं और तेजी से अपना कार्य पूरा करने में जुट गए हैं।कुम्हार समाज के लोगों में अधिक से अधिक दीये बनाकर बेचने की होड़ लगी हुई है।कुम्हारों को इस बार दिए और खिलौने की बिक्री तेज होने की उम्मीद है।


मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार रामदवन प्रजापती बताते है कि यह हमारा पुश्तैनी धंधा है, इसी से जीविका चलती है,लेकिन अब बाजार में रंगीने लाइटे आ गई है, जिससे लोगों ने दीयों का उपयोग कम कर दिया है, फिर भी आस है कि इस दिपावली पर उनके दियों की अधिक बिक्री होगी। दीपावली से पहले बिक्री बहुत कम रहती है, लेकिन दीपावली पर होने वाली बिक्री का इंतजार रहता है।इस बार दिवाली पर दियों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए दिये बनाये जा रहे है।उन्होंने कहा कि रंगीन लाइटों से घर सजाया जा सकता है, लेकिन पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान के लिए दियों का ही उपयोग किया जाता है।इसे देखते हुए दिया बनाने के काम में तेजी आई है। सामान्य दिया से लेकर रंग बिरंगे आकर्षक डिजाइन के दीपक भी तैयार किये जा रहे है।

हमारे भी दिए ले लो साहब!ताकि हम दोनों के घर खुशियों का दीपक जल सके
देश मे एक मुहिम केंद्र सरकार चला रही है”मेरी माटी,मेरा देश”जिसके तहत लोगों को स्वदेश की चीजों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।कुम्हार भाई भी चाहते हैं कि उनके दीये हम सभी खरीदे और बाहरी चीजो का परित्याग करे।शायद आपके दिये खरीदने से उनकी मेहनत और कला को बल मिलेगा और साथ ही उससे जो आमदनी होगी उनके भी बच्चों की खुशहाल दिवाली मन सकेगी।

हाथों की कारीगरी और डिजाइन वाले दिए बढ़ाते हैं घर की शोभा
गोरखपुर के बरगदवा के पास रहने वाले रामदवन प्रजापति ने बताया कि इस बार दिवाली पर दियों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, हम इस बार सामान्य दियों से लेकर रंग बिरंगे आकर्षक डिजाइन के दीपक भी तैयार कर रहे है। उन्होनें कहा कि हम ऐसे दिए तैयार कर रहे है, जो लोगो को आकर्षित करे।नए डिजाइन के साथ ही उन्हे रंगबिरंगे बना रहे है।

 

इस दिवाली पर शायद ये रहेगी कीमत,आप भी जान लें स्वदेशी और विदेशी का महत्व

मिट्टी का दीये 30 रुपए में 50, डिजाइनर दिये 5 रूपए का एक है। बाजार में मिट्टी के दिए के साथ ही डिजाइनर दिए की भी खास मांग है और चाइना के आइटम पंसद करने वाले लोग डिजाइर दिये को खास पंसद करते है।इसके साथ ही खिलौने, गुल्लक, गुड्डा-गुड़िया,हाथी घोड़े के भी सामान्य रेट तय किए गए है।

दुकानें लगाने को नहीं मिल पाता उचित स्थान,कमाई और देशी कला को फीका कर रही है चाइनीज बाजार

कुंभकार समाज को अपनी वस्तुओं को विक्रय करने के लिए कहीं भी उचित स्थान नहीं मिल पाता है। वहीं उन्होंने बताया कि निर्धारित जगहों पर दोनों तरफ दुकानें लगाई जाती हैं। जिसकी वजह से जाम की स्थिति बनी रहती है। वहीं उन्होंने शासन प्रशासन से अपील की है कि उन्हें दुकान लगाने के लिए उचित स्थान की व्यवस्था कराई जाए ताकि उनके विक्रय कार्य प्रभावित ना हो सके।

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