यूपी में ब्यूरोक्रेसी छोड़ राजनीति में उतरने की चर्चाएं तेज: IAS दिव्या मित्तल के बाद अब PCS अधिकारी अनुपमा सरोज ने दिया इस्तीफा, 2027 चुनाव से जोड़े जा रहे तार

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवाओं की कुर्सी छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले अधिकारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर तेज हो गई हैं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवाओं की कुर्सी छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले अधिकारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। पूर्व चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के करीब दो महीने बाद अब प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) संवर्ग की वरिष्ठ अधिकारी अनुपमा सरोज सिंह ने भी अपनी सरकारी नौकरी को अलविदा कह दिया है। वाणिज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर तैनात रहीं अनुपमा सरोज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर अपने त्यागपत्र की सार्वजनिक जानकारी दी है।

2027 विधानसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा फैसला

नौकरशाही के गलियारों से बाहर आए इस इस्तीफे को वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अनुपमा सरोज का परिवार पहले से ही प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी की अग्रिम पंक्ति की राजनीति में सक्रिय है.

सपा प्रवक्ता की पत्नी: अनुपमा सरोज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की धर्मपत्नी हैं।

मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि: उनकी मां सुशीला सरोज मोहनलालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से सांसद और पूर्व विधायक रह चुकी हैं।

ऐसे में एक मजबूत सियासी पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही आधिकारिक रूप से राजनीतिक मैदान में उतर सकती हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी सुरक्षित सीट से अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर सकती हैं।

प्रशासनिक दायित्व के साथ-साथ संगीत में भी बनाई पहचान

डिप्टी कमिश्नर के रूप में सेवा देने के अलावा अनुपमा सरोज पेशे से एक कुशल गायिका भी हैं। सोशल मीडिया और सांस्कृतिक मंचों पर उनके गाए गीतों और प्रस्तुतियों को खासी सराहना मिलती रही है। प्रशासनिक अनुशासन के साथ-साथ कला के क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है।

आधिकारिक ऐलान का इंतजार

हालांकि, अनुपमा सरोज की ओर से अभी तक सक्रिय राजनीति में शामिल होने या किसी विशिष्ट सीट से चुनाव लड़ने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन प्रशासनिक सेवा से अचानक दिए गए इस इस्तीफे ने प्रदेश के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है कि क्या आगामी दिनों में नौकरशाही से राजनीति का रुख करने वाले अधिकारियों की फेहरिस्त में कुछ और नए नाम भी जुड़ सकते हैं।

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