धर्म डेस्क

इस बार करवा चौथ को लेकर व्रती महिलाओं के मन में भद्रा के साये को लेकर असमंजस बना हुआ है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

इस बार करवा चौथ को लेकर व्रती महिलाओं के मन में भद्रा के साये को लेकर असमंजस बना हुआ है। पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ने वाला करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से निर्जला व्रत करती हैं।
हिंदू धर्म में भद्रा काल को अशुभ माना गया है और इस दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। पंचांग के अनुसार, भद्रा का आरंभ 28 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 31 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन 29 अक्टूबर को तड़के 4 बजकर 27 मिनट पर हो जाएगा। यानी व्रत शुरू होने तक भद्रा समाप्त हो चुकी होगी। ऐसे में करवा चौथ की पूजा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और महिलाएं बिना किसी चिंता के श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत कर सकती हैं।
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 17 मिनट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। चांद निकलने पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य देती हैं, फिर छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) October 27, 2026












