बिधूना: कारे कोया बसई में छठवें दिन गोवर्धन पूजा और रासलीला प्रसंग का भव्य वर्णन; उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

बिधूना

औरैया क्षेत्र के ग्राम तिलकपुर फार्म के कारे कोया बसई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन गोवर्धन महाराज की कथा और दिव्य रासलीला का प्रसंग बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

औरैया क्षेत्र के ग्राम तिलकपुर फार्म के कारे कोया बसई में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन गोवर्धन महाराज की कथा और दिव्य रासलीला का प्रसंग बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। कथा के दौरान पूरा पांडल ‘गिरिराज महाराज की जय’ और ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

कलयुग के पापों से मुक्ति का मार्ग है भगवान की भक्ति

कथा व्यास पंडित अशोक जी महाराज ने गोवर्धन लीला का दिव्य वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए विशाल गिरिराज पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली (छुंगनी) पर उठा लिया था।

कथा वाचक ने भक्ति की महिमा बताते हुए कहा कि इस कथा के प्रभाव से न जाने कितने ही लोगों ने सांसारिक मोह-माया और नौकरियों को छोड़कर प्रभु की भक्ति का मार्ग चुन लिया। उन्होंने कहा, “यदि मनुष्य कलयुग के पापों को छोड़कर भगवान में अपना चित्त (मन) लगाए, तो उसका जीवन सुफल हो जाता है।”

साधु-संत ही दिखाते हैं प्रभु का मार्ग

ईश्वर दर्शन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए पंडित अशोक जी महाराज ने एक सुंदर उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आंखों में लगा हुआ सुरमा हम स्वयं नहीं देख सकते और उसके लिए दर्पण की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार भगवान हमारे भीतर ही हैं, लेकिन उन्हें देखने के लिए हमें साधु-संतों को माध्यम बनाना होगा। संतों के मार्गदर्शन से ही प्रभु की भक्ति का मार्ग सहज और सुलभ होता है।

दाढ़ी वाली गोपी का प्रसंग सुन झूम उठे भक्त

कथा के अगले चरण में महाराज जी ने भगवान शिव के गोपी स्वरूप धारण कर रासलीला में पहुंचने का अत्यंत मनोरम प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भोलेनाथ रासलीला देखने पहुंचे, तो गोपी का भेष होने के बावजूद उन्हें पहचान लिया गया और श्री कृष्ण को सूचना दी गई कि रासलीला में कोई ‘दाढ़ी वाली गोपी’ आई है। इस प्रसंग को सुनकर पांडल में मौजूद श्रद्धालु हंस पड़े और भक्ति रस में झूमने लगे।

श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन बिधूना से युवाओं और श्रद्धालुओं की एक विशेष टोली अपने मित्रों के साथ कथा श्रवण करने आयोजन स्थल पर पहुंची। इस आध्यात्मिक अवसर पर मुख्य रूप से धर्मेंद्र सिंह सेंगर, सौरभ सिंह,आशुतोष शुक्ला, अनुराग ठाकुर,रोहित सेंगर, सुनील सिंह वैस,आदित्य सेंगर, मानस ठाकुर,आकाश चौहान और विकास चौहान सहित भारी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने गोवर्धन महाराज की महाआरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

 

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