पूर्वांचल विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला: अब MCQ नहीं, लिखित परीक्षा से परखी जाएगी छात्रों की काबिलियत

जौनपुर

जौनपुर जनपद के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

जौनपुर जनपद के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया है। कुलपति ने आगामी परीक्षाओं के लिए प्रस्तावित मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन (MCQ) आधारित परीक्षा प्रणाली और मशीन द्वारा मूल्यांकन (OMR/Digital Evaluation) के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अब विश्वविद्यालय की सभी परीक्षाएं अपनी पुरानी और पारंपरिक लिखित पद्धति के आधार पर ही आयोजित की जाएंगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता को बनाए रखने के लिए पारंपरिक लिखित परीक्षाएं अधिक प्रभावी हैं। कुलपति के अनुसार

गहन अध्ययन की आवश्यकता MCQ आधारित परीक्षाओं में छात्र अक्सर केवल सतही जानकारी जुटाते हैं, जबकि लिखित परीक्षाओं में उन्हें विषय का गहन अध्ययन करना पड़ता है।

विश्लेषणात्मक क्षमता वर्णनात्मक (Descriptive) उत्तर देने से छात्रों की सोचने, समझने और उसे अभिव्यक्त करने की क्षमता का सही आकलन हो पाता है।

शिक्षा की गुणवत्ता ओएमआर आधारित मूल्यांकन में छात्र की लेखन शैली और तर्क शक्ति की जांच नहीं हो पाती, जिससे लंबी अवधि में शिक्षा के स्तर पर प्रभाव पड़ सकता है।

शिक्षकों और छात्रों में मिश्रित प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय के इस निर्णय के बाद शैक्षिक जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

समर्थन अधिकांश शिक्षकों और शिक्षाविदों ने इसे एक सराहनीय कदम बताया है। उनका तर्क है कि इससे नकल पर लगाम लगेगी और छात्र शॉर्टकट अपनाने के बजाय मेहनत से पढ़ाई करेंगे।

अन्य मत वहीं, कुछ छात्रों और जानकारों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के इस दौर में MCQ का अभ्यास भी जरूरी था और आधुनिक तकनीक (मशीन मूल्यांकन) से परिणाम जल्दी घोषित करने में मदद मिलती।

आगामी परीक्षाओं पर प्रभाव

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह निर्णय छात्रों के दीर्घकालिक हित और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अब सभी संबंध कॉलेजों और विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे आगामी सत्र की परीक्षाओं के लिए पारंपरिक लिखित पद्धति के अनुसार ही तैयारी सुनिश्चित करें।

 

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