सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज उठा, जब जिले के विभिन्न स्कूलों से आए लगभग 300 रसोइयों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर नारों से गूंज उठा, जब जिले के विभिन्न स्कूलों से आए लगभग 300 रसोइयों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। रसोइयों का कहना है कि महज ₹2,000 प्रतिमाह में परिवार का गुजारा करना नामुमकिन है। उन्होंने सरकार से न्यूनतम वेतन ₹18,000 करने की पुरजोर मांग की है।

“अधिकारी के बच्चे कॉन्वेंट में, हमारे बच्चे कहां जाएं?”
प्रदर्शन के दौरान रसोइयों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। रसोइया संगीता और सुमन ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, “बड़े अधिकारियों और हेडमास्टरों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन ₹2,000 में हम अपने बच्चों का भविष्य कैसे संवारें? हमसे खाना बनवाने के अलावा झाड़ू लगवाना, बर्तन धुलवाना और फर्श साफ कराने जैसे काम भी लिए जाते हैं, फिर भी हमें सबसे कम मेहनताना मिलता है।”
वेतन विसंगति और शोषण का आरोप
प्रदर्शनकारी राधा और कमल देवी ने बताया कि स्कूल के अन्य कर्मचारियों को लाखों में वेतन मिलता है, जबकि दिन भर मेहनत करने वाली रसोइयों को धमकियों का सामना करना पड़ता है। रसोइयों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं
न्यूनतम वेतन ₹18,000 से ₹26,000 प्रतिमाह किया जाए।
काम के दौरान होने वाले भेदभाव और ‘निकालने की धमकी’ पर रोक लगे।
कार्य की परिस्थितियों में सुधार कर गरिमापूर्ण वातावरण सुनिश्चित हो।
रसोइयों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो वे अपने बच्चों के भविष्य और हक के लिए इस लड़ाई को और तेज करेंगे।
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