बलरामपुर: प्रधान के घर हिंसक विवाद के बाद राजनीतिक हलचल तेज, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

 

बलरामपुर

बलरामपुर जनपद कोतवाली नगर क्षेत्र के सेखुइया गांव में 25 अक्टूबर को पुआल रखने को लेकर प्रधान सियानंद वर्मा और सुमित सिंह के परिवार के बीच हुई।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

बलरामपुर जनपद कोतवाली नगर क्षेत्र के सेखुइया गांव में 25 अक्टूबर को पुआल रखने को लेकर प्रधान सियानंद वर्मा और सुमित सिंह के परिवार के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस विवाद ने अब जातिगत और राजनीतिक रंग ले लिया है।

प्रधान ने दर्ज कराया मुकदमा

प्रधान सियानंद वर्मा ने नगर कोतवाली में 17 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। प्रधान का आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने लाठी-डंडों और कुदाल से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया, साथ ही उनकी मोटरसाइकिल और बोलेरो वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक केवल तीन आरोपियों को ही गिरफ्तार कर पाई है, जबकि अन्य आरोपी फरार हैं।

राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप

इस घटना ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवलाल और अन्य पदाधिकारियों ने पीड़ित और विपक्षी दोनों परिवारों से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कथित तौर पर घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया और नजरबंद कर दिया गया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने पुलिस पर समय पर कार्रवाई न करने और राजनीतिक रूप से सक्रिय नेताओं को दबाने का आरोप लगाया है।

सामाजिक संगठनों में असंतोष

सामाजिक संगठनों ने भी पुलिस की धीमी कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया है। अभिजीत सिंह पटेल सहित कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि गिरफ्तारी केवल दो-तीन लोगों की हुई है। उन्होंने सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

क्षत्रिय महासभा के संजय सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कहा कि दूसरे पक्ष की सुनवाई नहीं हो रही है, जबकि उनके लोग भी घायल हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि शीघ्र निष्पक्ष कार्रवाई न होने पर क्षत्रिय समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के मुख्य आरोपी राहुल सिंह का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया, जबकि वह मौके पर मौजूद था।

सपा, कांग्रेस और अन्य जातीय संगठन इस मामले में पीड़ितों से मिलने और न्याय दिलाने के लिए सक्रिय हो गए हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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