“ब्यूरो रिपोर्ट
भावनात्मक श्रद्धांजलि
बाईसरन की हरियाली, जो कभी प्रेम और शांति का प्रतीक थी, आज खामोश है। वहां की हवा, जो कभी पर्यटकों की खिलखिलाहटों से गूंजती थी, आज आहों और सिसकियों से बोझिल है।
पहलगाम आतंकी हमले को अपनी आंखों के सामने घटते हुए देखने वाले पर्यटकों के लिए यह एक दिल दहला देने वाली घटना रही pic.twitter.com/VGX6ahrFYz
— Voice of News 24 (@VOfnews24) April 23, 2025
बाईसरन की हरियाली, जो कभी प्रेम और शांति का प्रतीक थी, आज खामोश है। वहां की हवा, जो कभी पर्यटकों की खिलखिलाहटों से गूंजती थी, आज आहों और सिसकियों से बोझिल है। 26 मासूम जिंदगियाँ—जिनमें देश के कोने-कोने से आए लोग थे—अब नहीं हैं। वे आए थे सुकून ढूँढने, लेकिन लौटे ताबूतों में।
आतंकियों ने पूछा नाम, हिंदू होने पर मार दी गोली pic.twitter.com/L6Z9Ya8c4M
— Voice of News 24 (@VOfnews24) April 22, 2025
यह हमला किसी एक परिवार पर नहीं, पूरी मानवता पर हमला है। एक माँ का बेटा, एक पिता की बेटी, एक नवविवाहित जोड़ा—सब कुछ छिन गया एक क्षण में। आतंक की बंदूक ने न केवल शरीरों को छलनी किया, बल्कि अनगिनत सपनों, उम्मीदों और रिश्तों को भी चकनाचूर कर दिया।
उन परिवारों की पीड़ा की कोई भाषा नहीं हो सकती। यह केवल आँसू नहीं, एक राष्ट्र का क्रंदन है। और इस क्रंदन के बीच उठती है एक पुकार—हम भूलेंगे नहीं। हम माफ नहीं करेंगे।
उस वक्त का वीडियो जब आतंकी लोगों को गोलियां मार रहे थे. pic.twitter.com/lKL7KQF1Rn
— Voice of News 24 (@VOfnews24) April 22, 2025
यह श्रद्धांजलि केवल शब्दों की नहीं, बल्कि संकल्प की है। उन 26 चेहरों के नाम, जो अब तस्वीरों में कैद रह गए, हमें हर दिन याद दिलाते रहेंगे कि हमें आतंक के खिलाफ और भी संगठित होना है। उनका बलिदान व्यर्थ न जाए—यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
“गांव की कटिंग चाय” मासिक पत्रिका,पति पत्नी और वो, जानें क्या है? इन सभी में संबंध, हैरान कर देने वाले कुछ रोचक तथ्य एवं महत्वपूर्ण घटनाएं, हृदय को झकझोर देने वाली ये मासिक पत्रिका एक बार जरूर
— Voice of News 24 (@VOfnews24) April 18, 2025























