लोकसभा में गूंजी बौद्ध विरासत की गूँज: सांसद जगदम्बिका पाल ने बौद्ध अध्ययन को मुख्यधारा में लाने की उठाई मांग

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर लोकसभा में आज सांसद जगदम्बिका पाल ने भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को शिक्षा और वैश्विक कूटनीति से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर लोकसभा में आज सांसद जगदम्बिका पाल ने भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को शिक्षा और वैश्विक कूटनीति से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने देश के विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन Buddhist Studies को मुख्यधारा के पाठ्यक्रम में व्यवस्थित रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

NEP 2020 के तहत व्यापक योजना की मांग

सांसद जगदम्बिका पाल ने सरकार से पूछा कि क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर बौद्ध अध्ययन को विकसित करने की कोई विशेष योजना है। उन्होंने जोर दिया कि

मानकीकृत पाठ्यक्रम: क्या पाली भाषा, बौद्ध दर्शन, तिब्बती अध्ययन, पुरातत्व और विरासत संरक्षण जैसे विषयों को शामिल कर एक स्टैंडर्ड सिलेबस तैयार किया जा रहा है?

उत्कृष्टता केंद्र: क्या सिद्धार्थनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कुशीनगर और धर्मशाला जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों पर ‘विशेष अध्यासन’ या ‘उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे?

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: श्रीलंका, जापान, थाईलैंड, भूटान और म्यांमार जैसे बौद्ध देशों के साथ शैक्षिक एवं सांस्कृतिक साझेदारी बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?

सरकार का पक्ष: डिजिटल और विश्वविद्यालय स्तर पर प्रयास जारी

सांसद के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में विभिन्न विश्वविद्यालयों में बौद्ध अध्ययन के पाठ्यक्रम संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल क्रांति का लाभ देते हुए सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘स्वयं’ पर भी संबंधित विषयों के पाठ्यक्रम छात्रों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

बौद्ध सर्किट के विकास पर जोर

जगदम्बिका पाल ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट क्षेत्र को अकादमिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की मांग की। उनका मानना है कि इस पहल से न केवल शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और पर्यटन को भी नई मजबूती मिलेगी।

 

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