लोकसभा: सांसद जगदंबिका पाल ने उठाई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की आवाज; मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा की मांग

सिद्धार्थनगर

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को लोकसभा के ‘शून्यकाल’ के दौरान देश की लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हितों का मुद्दा प्रखरता से उठाया। पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद के डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को लोकसभा के ‘शून्यकाल’ के दौरान देश की लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हितों का मुद्दा प्रखरता से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान उनके अल्प मानदेय, कठिन सेवा-शर्तों और सामाजिक सुरक्षा के अभाव की ओर आकर्षित करते हुए सरकार से ठोस नीतिगत समाधान का आग्रह किया।

₹6,000 मानदेय को बताया अपर्याप्त

सांसद पाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में लगभग 12.93 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 11.64 लाख सहायिकाएं कार्यरत हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 2.86 लाख महिलाएं इस सेवा से जुड़ी हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इतनी महत्वपूर्ण सेवाओं के बदले उन्हें मात्र ₹6,000 मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान कमरतोड़ महंगाई में जीवन-यापन के लिए अत्यंत कम है।

मातृत्व और ग्रीष्मकालीन अवकाश की वकालत

पाल ने सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017 के बावजूद इन कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक रूप से 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों की तर्ज पर आंगनवाड़ी केंद्रों में भी ग्रीष्मकालीन अवकाश देने की मांग की, ताकि कार्यकर्ताओं को उचित विश्राम मिल सके।

सरकार की ‘आधारशिला’ हैं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता

सांसद ने सदन को बताया कि पोषण अभियान, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन की असली ‘आधारशिला’ यही कार्यकर्ता हैं। उच्चतम न्यायालय के विभिन्न अवलोकनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को उनकी सेवा-शर्तों और अधिकारों पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।

Voice Of News 24