लखनऊ: बलरामपुर गार्डन में आरम्भ हुआ 22वाँ राष्ट्रीय पुस्तक मेला : पुस्तकों की सुवास और सांस्कृतिक सरगम से महका साहित्यिक महोत्सव

लखनऊ 

“पुस्तक केवल कागज़ पर छपी स्याही नहीं, बल्कि वह आत्मा है जो आने वाली पीढ़ियों को विचार, मूल्य और दिशा देती है। यही इस साहित्यिक महोत्सव का सच्चा संदेश है।”

नवाबों की नगरी आज फिर किताबों की ख़ुशबू से सराबोर हो उठी। बलरामपुर गार्डन, अशोक मार्ग में 22वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले का शुभारम्भ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। साहित्य, संस्कृति और संवाद के इस महाकुंभ की गूंज 14 सितम्बर तक पूरे नगर और देश के पुस्तकप्रेमियों को आमंत्रित करती रहेगी।

इस वर्ष मेले की थीम है—“विजन 2047 : विकसित भारत, विकसित प्रदेश”। उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल ने रामायण, महाभारत और विवेकानंद के शिकागो भाषण जैसी अपनी प्रिय पुस्तकों को आत्मीय भाव से देखा और खरीदा। प्रकाशकों की ओर से उन्हें माँ अहिल्याबाई, नर से नारायण, तत्वमसि जैसी नौ पुस्तकों का विशेष सेट भेंट किया गया, साथ ही अहमदाबाद के अपूर्व शाह ने उन्हें ‘एक इंची गीता गुटका’ अर्पित किया, जो अपने आप में एक अनुपम उपहार रहा।

मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने स्मृतियों के झरोखे से उन सुनहरे पलों को याद किया जब इस पुस्तक मेले में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, पूर्व राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री और राम नाइक जैसे विभूतियों ने अपनी उपस्थिति से साहित्यिक चेतना को समृद्ध किया था। सह-संयोजक आस्था ढल, आकर्षण जैन तथा निदेशक आकर्ष चंदेल सहित अन्य गणमान्यजनों ने अतिथियों का स्वागत किया।

पुस्तक और पाठक का उत्सव

मेले में प्रवेश पूर्णत: निःशुल्क है और प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक पाठक पुस्तकों के इस महोत्सव का आनंद ले सकते हैं। दिल्ली, अहमदाबाद, गाजियाबाद, भागलपुर, गुरुग्राम, प्रयागराज और लखनऊ सहित देशभर से प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान अपनी नवीनतम कृतियों के साथ उपस्थित हैं।
राजकमल, वाणी, भारतीय ज्ञानपीठ, प्रभात, सस्ता साहित्य मण्डल, गीता प्रेस गोरखपुर, हिन्द युग्म, ओशो फाउंडेशन, ठाकुर पब्लिकेशन, श्रीरामकृष्ण मठ, बोधरस प्रकाशन और अनेक नामचीन संस्थानों के स्टॉल पाठकों को आकर्षित कर रहे हैं।

विशेष आकर्षण यह है कि प्रत्येक पुस्तक पर न्यूनतम 10 प्रतिशत छूट उपलब्ध रहेगी।

 साहित्य और संस्कृति का संगम

केवल पुस्तकें ही नहीं, बल्कि संस्कृति भी इस मेले की आत्मा है। उद्घाटन दिवस पर ओशो फाउंडेशन तथा डॉ. शशि चक्रवर्ती और उनके साथियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। आने वाले दिनों में कवि सम्मेलन, मुशायरे, पुस्तक लोकार्पण और बच्चों के लिए बाल कोना विशेष आकर्षण रहेंगे, जहाँ कहानी सत्र और प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी।

आज के कार्यक्रम (5 सितम्बर)

* प्रातः 11:00 बजे – युवाओं का विशेष कार्यक्रम
* दोपहर 12:00 बजे – श्याम नारायण पांडेय सृजन पीठ की संगोष्ठी
* अपराह्न 3:30 बजे – डॉ. राहुल मिश्रा की पुस्तकों का विमोचन
* शाम 5:00 बजे – विविध पुस्तकों का विमोचन
* रात्रि 7:00 बजे – काव्य गोष्ठी

राष्ट्रीय पुस्तक मेले को यूपी मेट्रो, रेडियो सिटी, ओरिजिंस, किरण फाउंडेशन, ज्वाइन हैंड्स फाउंडेशन, लोकआंगन और विश्वम् फाउंडेशन जैसे सहयोगी संस्थानों का समर्थन प्राप्त है।

“यह पुस्तक मेला केवल साहित्यिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घोषणा है—कि भारत की आत्मा आज भी पुस्तक के पन्नों में जीवित है, और कल के सपनों को शब्दों के सहारे गढ़ रही है।”

 

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