महराजगंज:चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर में छात्रों का हंगामा,तोड़फोड़ और विरोध प्रदर्शन

महराजगंज

महराजगंज जनपद के नगर पालिका परिषद सिसवा की घटना प्रिंसिपल की गाड़ी के शीशे टूटे, स्कूल की संपत्ति को पहुंचाया नुकसान – मौके पर तैनात रही पुलिस। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

महराजगंज जनपद के नगर पालिका परिषद सिसवा में आज गुरुवार को स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर में उस समय अफरातफरी मच गई जब विद्यालय के छात्रों और छात्राओं ने अचानक उग्र रूप धारण करते हुए स्कूल परिसर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। मामला उस समय भड़का जब छात्रों को पता चला कि विद्यालय प्रशासन द्वारा एक वरिष्ठ अध्यापक को स्कूल से बाहर कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय के एक लोकप्रिय अध्यापक को प्रशासन ने बगैर स्पष्ट कारण बताए सेवा से मुक्त कर दिया। जैसे ही यह खबर विद्यार्थियों के बीच फैली, उनमें रोष फैल गया। देखते ही देखते दर्जनों की संख्या में छात्र और छात्राएं एकत्र हो गए और प्रशासन के इस कदम के विरोध में नारेबाजी करने लगे। मामला धीरे-धीरे इतना बिगड़ गया कि छात्रों ने विद्यालय की खिड़कियों, दरवाजों, जंगलों तथा मुख्यद्वार को क्षतिग्रस्त कर दिया।

प्रिंसिपल की गाड़ी को बनाया निशाना

आक्रोशित छात्रों का गुस्सा विद्यालय के प्रिंसिपल पर भी फूटा। छात्रों ने प्रिंसिपल की खड़ी गाड़ी पर पथराव कर उसके शीशे तोड़ दिए। गाड़ी को काफी क्षति पहुंचाई गई। यह घटना विद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है कि छात्रों के बीच संवादहीनता और विश्वास की कमी किस तरह बड़े घटनाक्रम को जन्म दे सकती है।

पुलिस की मौजूदगी और स्थिति नियंत्रण में लाने का प्रयास

घटना की सूचना मिलते ही कोठीभार थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की। पुलिस ने पहले छात्रों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ में मौजूद कुछ छात्रों ने पुलिस की बात नहीं मानी। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और प्रशासन ने छात्रों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग नहीं करते हुए संयम से काम लिया। कुछ घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका।

विद्यालय प्रशासन की सफाई

घटना के बाद विद्यालय प्रशासन ने प्रेस को एक संक्षिप्त बयान जारी कर बताया कि संबंधित अध्यापक को अनुशासनहीनता के चलते विद्यालय से हटाया गया है। प्रशासन का कहना है कि निर्णय विद्यालय की गरिमा और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

विद्यालय के प्रबंधक ने कहा कि “हम छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन इस प्रकार का व्यवहार अस्वीकार्य है। विद्यालय एक अनुशासित संस्था है और यदि छात्रों को कोई आपत्ति थी तो वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख सकते थे। संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और हिंसा का रास्ता अपनाना समाधान नहीं है।”

छात्रों की मांग – अध्यापक की वापसी
हंगामा करने वाले छात्र-छात्राओं की प्रमुख मांग है कि हटाए गए अध्यापक को वापस बुलाया जाए। उनका कहना है कि वह अध्यापक न केवल पढ़ाई में कुशल थे, बल्कि विद्यार्थियों के साथ उनका व्यवहार भी प्रेरणादायक था। कई छात्रों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप भी लगाया।

भविष्य की चिंता और समाधान की राह

इस घटना ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और संवाद की अत्यधिक आवश्यकता है। छात्रों की भावनाएं महत्वपूर्ण होती हैं और उन्हें नजरअंदाज करना शिक्षा के उद्देश्य के विरुद्ध जाता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर इस मुद्दे को कैसे हल करते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

 

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