भारत छोड़ने की आदेश के बाद मुल्क लौटते समय अटारी बार्डर पर रो पड़े पाकिस्तानी नागरिक,सता रहीं अपनों से बिछड़ने की यादें!

ब्यूरो रिपोर्ट

बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की वैसरन घाटी में हुए कायराना आतंकी हमले के दौरान शहीद हुए 28 बेकसूरों के बदले की आग में भुन रहें भारत में आशियाना बनाकर रहने वाले पाकिस्तानी नागरिक।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की वैसरन घाटी में हुए कायराना आतंकी हमले के दौरान शहीद हुए 28 बेकसूरों के बदले की आग में भुन रहें भारत में आशियाना बनाकर रहने वाले पाकिस्तानी नागरिक।
भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत भारत से अब पाकिस्तानी नागरिक पंजाब के अटारी बार्डर से मुल्क लौटायें जा रहे हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों की व्यथाएं वास्तव में दिल को झकझोर देने वाली है। लेकिन पाकिस्तानी आतंकियों के शर्मनाक हरकत की आग में मासूम पाकिस्तानी नागरिकों का ख्वाब जलकर खाक हो जा रहा है।

मुल्क लौटते समय पाकिस्तानी नागरिकों ने मीडिया से बातचीत के दौरान किसी ने बताया कि मैं अपने पति से बिछड़ जा रही हूं, तो किसी को अपने बच्चों की मासूमियत दिलों में खंजर जैसी वार कर रही है तो किसी को आपसी प्रेम की जंजीर में बंधी अपने बेटी की यादें खुलकर बिखरती नज़र आ रही है।

मुल्क लौटने वाले पाकिस्तानी नागरिकों का भी कहना है कि पहलगाम में हुआ आतंकी कायराना हमला निंदनीय है, लेकिन उस हमले का हम सभी से कोई ताल्लुक नहीं है, फिर भी हम सभी पाकिस्तानी नागरिक होने के कारण बदले की आग में जल रहें हैं।
पाकिस्तान वापसी के दौरान एक युवा ने बताया कि मेरी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई भारत से ही संपन्न हुई है और आगे भी मेरी पढ़ाई जारी है। आगे की मेरी पढ़ाई,भारत सरकार की पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी कार्रवाई में अधूरी रहने की बिगुल बजने जैसी संकेत दे रही है, जो मेरी जीवन के आधार और मेहनत एवं ख्वाबों को मुकम्मल करने की अरमानों पर पानी फेर रही है।

इतना ही नहीं किसी ने बताया कि मैं 41 वर्ष, तो किसी ने 30 वर्ष, तथा किसी 10 वर्ष एवं किसी ने बताया 8 वर्षों से भारत में ही निवास कर रहे हैं, आखिर हम लोग पाकिस्तान में कहां जायेंगे? जहां हमारा कोई नहीं है।
मुल्क लौटते समय वास्तव में पाकिस्तानी नागरिक अपनों से बिछड़ने का दर्द से अपनों के ही दिलों में चिराग़ को बुझाने को मजबूर हो गए।