सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी सोच को तोड़कर, नारी शक्ति ने पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया

आज का युग बदल चुका है। सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी सोच को तोड़कर, नारी शक्ति ने पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट 

आज का युग बदल चुका है। सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी सोच को तोड़कर, नारी शक्ति ने पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। चाहे खेल हो, राजनीति हो, विज्ञान हो या कला, हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।

राजनीति

आज महिलाएं देश और दुनिया के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। वे न केवल कुशल प्रशासक साबित हुई हैं, बल्कि उन्होंने सामाजिक बदलाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं. वे 2007 से 2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति रहीं. वे एक वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य भी रह चुकी हैं

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति थीं। वे 2007 से 2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति के रूप में सेवा देने वाली थीं। उनका जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में हुआ था।

प्रतिभा पाटिल एक वकील और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की सदस्य भी रही थीं। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत 1960 के दशक में की और धीरे-धीरे राज्य विधानसभा से लेकर राज्यपाल तक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे राजस्थान की राज्यपाल भी रही थीं, इससे पहले कि उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया गया।

उनकी राष्ट्रपति बनने की यात्रा भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण थी, क्योंकि वे भारतीय इतिहास में पहले महिला राष्ट्रपति बनीं, और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

खेल

खेल के मैदान में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश का नाम रौशन किया है।

हवा से बातें करने वाली धावक पीटी उषा को ‘उड़न परी’ के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने तीन ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है. अब इस महान एथलीट एशियाई खेल 1986 – गोल्डन गर्ल की स्वर्णिम दौड़

पीटी उषा ने सियोल खेल में ट्रैक और फील्ड में रिकॉर्ड सबसे अधिक व्यक्तिगत पदक जीते, जिसमें चार स्वर्ण और एक रजत पदक शामिल था। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उन्होंने महज दो घंटे के भीतर तीन रेस में हिस्सा लिया।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी बुद्धिमत्ता और कौशल का परिचय दिया है।

 

कल्पना चावला (17 मार्च 1962 – 1 फरवरी 2003) एक भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और एयरोस्पेस इंजीनियर थीं, जो अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला थीं। उन्होंने पहली बार 1997 में एसटीएस-87 पर एक मिशन विशेषज्ञ और प्राथमिक रोबोटिक आर्म ऑपरेटर के रूप में स्पेस शटल कोलंबिया से उड़ान भरी थी।
कला और साहित्य
कला और साहित्य के क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी रचनात्मकता से समाज को नई दिशा दी है।महिला दिवस पर लता मंगेशकर जी का जिक्र न करना वाकई नाइंसाफी होगी। लता जी न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में अपनी सुरीली आवाज और कला के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपनी गायकी से कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है और भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई है।लता मंगेशकर जी को ‘स्वर कोकिला’ के नाम से जाना जाता है। उनकी आवाज में एक ऐसी मिठास थी जो सीधे श्रोताओं के दिलों को छू जाती थी।

महिलाओं ने समाज के उस आईने को ही बदल दिया है, जिसमें उन्हें हमेशा कमजोर और आश्रित के रूप में देखा जाता था।उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं।आज महिलाएं आत्मनिर्भर और सशक्त हैं, और वे अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमें महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए हमेशा संघर्ष करते रहना चाहिए। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां महिलाएं सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें, और जहां उन्हें अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने का अवसर मिले।आज, महिला दिवस के अवसर पर, हम उन सभी महिलाओं को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और प्रतिभा से समाज को प्रेरित किया है।

 

 

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