महराजगंज
जनपद महराजगंज के सिसवा विकास खंड के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के प्रतिष्ठित पटल पर अपनी पहचान बनाने वाले युवा कवि और साहित्यकार अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’ ने एक बार फिर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। अविनाश ने दूरदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित मंच पर “डिजिटल युग में खोता हुआ प्रेम” विषय पर अपनी बेहद भावपूर्ण और प्रभावशाली कविता प्रस्तुत कर दर्शकों व श्रोताओं का मन मोह लिया।
तकनीक की चमक में खोती संवेदनाओं पर किया प्रहार
आधुनिक दौर में तकनीक के अति-उपयोग और मानवीय रिश्तों में आ रहे बिखराव को कवि ‘डोपामिन’ ने अपनी सशक्त पंक्तियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। कविता पाठ के दौरान सभागार में मौजूद साहित्यप्रेमी भावुक हो उठे और पूरा माहौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
“आज तकनीक ने पूरी दुनिया को भले ही इंसान की हथेलियों (मोबाइल) तक समेट दिया हो, लेकिन विडंबना यह है कि दिलों के बीच की दूरियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। रिश्तों की आत्मीयता, संवाद की मिठास और प्रेम की सहजता अब आभासी दुनिया की चमक-दमक में कहीं खोती जा रही है।”
अविनाश चंद श्रीवास्तव ‘डोपामिन’
उनकी इस रचना ने समाज और युवा पीढ़ी को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। कविता के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि जीवन में आधुनिक संसाधनों से कहीं अधिक मूल्यवान हमारे सच्चे रिश्ते, मानवीय संवेदनाएं और निस्वार्थ प्रेम हैं।
गेरमा गांव से दूरदर्शन के मंच तक का सफर
मूल रूप से सिसवा विकास खंड के ग्राम सभा गेरमा के निवासी अविनाश एक सुशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता सुरेश चंद श्रीवास्तव पेशे से शिक्षक हैं, माता अर्चना श्रीवास्तव कुशल गृहिणी हैं तथा बड़े भाई अभिषेक श्रीवास्तव पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
अविनाश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर एक नजर
प्रारंभिक शिक्षा: सरस्वती शिशु मंदिर, सिसवा बाजार।
हाईस्कूल व इंटरमीडिएट: चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर, सिसवा।
स्नातक महात्मा गांधी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, गोरखपुर।
परास्नातक (M.Sc. केमिस्ट्री): सेंट एंड्रयूज कॉलेज, गोरखपुर।
वर्तमान स्थिति: रसायन शास्त्र (Chemistry) विषय में पीएचडी स्कॉलर (PhD Scholar) के रूप में शोध कार्य कर रहे हैं।
माता-पिता और गुरुओं के आशीर्वाद को दिया श्रेय
दूरदर्शन के मंच पर मिली इस बड़ी कामयाबी को अविनाश ने अपने जीवन का सबसे गौरवपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने दूरदर्शन उत्तर प्रदेश परिवार, वरिष्ठ साहित्यकारों और देश-दुनिया के दर्शकों का आभार जताया।
अविनाश ने भावुक होते हुए कहा, “आज मैं जो कुछ भी हूँ, अपने माता-पिता और गुरुजनों के आशीर्वाद की बदौलत हूँ। पाठकों और श्रोताओं से मिलने वाला स्नेह ही मेरी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा है।” उन्होंने भविष्य में भी अपनी साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय मूल्यों और संवेदनशील विचारों को नई पीढ़ी तक निरंतर पहुँचाने का अपना संकल्प दोहराया। उनकी इस शानदार प्रस्तुति पर सिसवा क्षेत्र सहित पूरे महराजगंज जिले के साहित्यानुरागियों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।













