महराजगंज: तराई में कड़ाके की ठंड और कोहरे की वापसी, ‘जीरो विजिबिलिटी’ से जनजीवन अस्त-व्यस्त

महराजगंज

महराजगंज जनपद के तराई क्षेत्रों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में कड़ाके की ठंड और गलन ने दस्तक दे दी है पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट।

महराजगंज जनपद के तराई क्षेत्रों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में कड़ाके की ठंड और गलन ने दस्तक दे दी है। पिछले कुछ दिनों की खिली धूप के बाद अचानक छाए घने कोहरे और सर्द हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

नेपाल सीमा से सटे इलाकों में बढ़ी गलन

भारत-नेपाल सीमा से सटे ठूठीबारी सहित तराई के लगभग सभी क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अचानक बढ़ी इस गलन ने खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। चिकित्सकों ने इस जानलेवा ठंड और गलन को देखते हुए बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने और घरों में रहने की सलाह दी है।

राहगीरों की बढ़ी मुसीबत, हेडलाइट के सहारे रेंग रहे वाहन

घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई है। आलम यह है कि दिन के उजाले में भी सड़क पर चलने वाले राहगीर और वाहन चालक हेडलाइट और डीपर जलाने को मजबूर हैं। घने कोहरे के चलते परिवहन सेवा पर भी इसका बुरा असर पड़ा है, जिससे बाहर काम पर जाने वाले दैनिक मजदूरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ठिठुरन ने बढ़ाई अलाव की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी कुछ ही दिन पहले मौसम साफ हुआ था, लेकिन दोबारा शुरू हुई इस गलन ने शरीर को सुन्न कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लोग अब सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की मांग कर रहे हैं ताकि राहगीरों और जरूरतमंदों को इस हाड़ कंपाने वाली ठंड से कुछ राहत मिल सके।

 

 

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