महराजगंज: डॉ. मार्कण्डेय लोक चिकित्सालय पर चला स्वास्थ्य विभाग का डंडा,ओटी सील

महराजगंज

महराजगंज जनपद के आनंदनगर में स्थित माना जाना डॉ. मार्कण्डेय लोक चिकित्सालय पर शुक्रवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई हुई है। पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट 

महराजगंज जनपद के आनंदनगर में स्थित माना जाना डॉ. मार्कण्डेय लोक चिकित्सालय पर शुक्रवार शाम को स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. श्रीकांत शुक्ला के नेतृत्व में एक निरीक्षण टीम ने अस्पताल का औचक दौरा किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इन खामियों के चलते चिकित्सालय का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, और साथ ही ऑपरेशन थियेटर (ओटी) को भी सील कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान अस्पताल के संचालक मनोज कुमार मिश्रा तो मौके पर मौजूद थे, लेकिन पंजीकृत तीन चिकित्सकों में से केवल डॉ. सौरभ अग्रहरी (एमबीबीएस) ही उपस्थित पाए गए। टीम ने जब मरीजों को रक्त चढ़ाने से जुड़े रिकॉर्ड मांगे, तो प्रबंधक ने बताया कि दो महीने पहले सुमन चैरिटेबल ब्लड बैंक से रक्त लिया गया था, लेकिन वे इसका कोई वैध प्रमाण या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

इसके अतिरिक्त, पिछले महीने भर्ती हुए मरीजों के बीएचटी (बैड हेड टिकट) नोट्स की जांच में भी गंभीर लापरवाही उजागर हुई। इन नोट्स पर न तो एनेस्थेटिस्ट और न ही सर्जन के हस्ताक्षर थे, जो अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निरीक्षण के समय अस्पताल में कोई ऑन-कॉल चिकित्सक उपलब्ध नहीं था, जो आपातकालीन सेवाओं के प्रति अस्पताल की उदासीनता को दर्शाता है।

मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय ने प्रबंधक को एक नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला और अस्पताल का संचालन जारी पाया गया, तो कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधक की होगी।

इस संबंध में, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि औचक निरीक्षण के दौरान बीएचटी में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके कारण ओटी को सील करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अस्पताल द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड नियमों के अनुसार पूरे नहीं कर लिए जाते, तब तक अस्पताल के संचालन पर प्रतिबंध लगा रहेगा।

 

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