सिद्धार्थनगर
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय।पूरी जानकारी के पढ़िए वाॅयस ऑफ़ न्यूज 24 की खास रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के 9वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। विश्वविद्यालय पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।
48 को गोल्ड मेडल, 32 को पीएचडी की उपाधि
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न संकायों के 37 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल और विभिन्न विषयों में शोध कार्य करने वाले 32 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय को QS I-Gaug अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा गोल्ड मेडल दिए जाने पर बधाई दी।
राज्यपाल के संबोधन
अपने संबोधन में राज्यपाल ने छात्रों को प्रेरित किया “प्रदेश और केंद्र की सरकार पीएचडी पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। छात्र-छात्राओं को चाहिए कि विभिन्न विषयों में पीएचडी कर अपने क्षेत्र का और भारत का नाम रोशन करें।”
राज्यपाल के संबोधन में कहा हेलीकॉप्टर से नीचे हरियाली न दिखने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हर साल लाखों की संख्या में वृक्ष लगाए जाते हैं, लेकिन ठीक से देखरेख न होने से वह धरातल पर नहीं दिखते।उन्होंने हर किसी को वृक्षारोपण अभियान में रुचि दिखाते हुए भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
राज्यपाल ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के छात्रों को भी शिक्षा दे रहा है। उन्होंने एक नेपाली छात्रा का उदाहरण दिया जिसकी माँ ने उसे भारत में पढ़ाया।
उन्होंने कहा, “आज भारत हर क्षेत्र में निरंतर तरक्की कर रहा है। अमेरिका जिससे पूरा विश्व डरता था, अमेरिका के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं, जबकि भारत आज विश्व में तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।”
शांति और सुरक्षा: उन्होंने कहा, “भारत शांति पर विश्वास रखता है, लेकिन वक्त पड़ने पर घर में घुसकर भी मारता है।”
आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल, उत्तर प्रदेश) “छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सपने देखें, लेकिन सपनों को कर्म में बदलें।”
विश्वविद्यालय की छात्रा पल्लवी मिश्रा, जिन्हें हिंदी विषय में पीएचडी की उपाधि मिली, ने अपनी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पीएचडी करना आसान नहीं होता, इसमें बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन यह इंसान को धैर्य रखना सिखाती है।पल्लवी ने हिंदी को भारत की मातृभाषा बताते हुए कहा कि उन्हें हिंदी से काफी लगाव है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान समय में अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के अनुरूप हिंदी को वह स्थान नहीं मिल सका है जो उसे मिलना चाहिए। उन्होंने सबको हिंदी को सर्वोपरि रखने की अपील की। पल्लवी मिश्रा ने अपनी पीएचडी की उपाधि अपने पिताजी को समर्पित की।
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— Voice of News 24 (@VOfnews24) November 10, 2025























