सिद्धार्थनगर: माटी कला को बढ़ावा देने कुम्हार की चौखट पर पहुंचे डीएम शिवशरणप्पा जीएन, इलेक्ट्रिक चाक चलाकर बनाए दीये; की खरीदारी

नौगढ़

सिद्धार्थनगर जनपद में प्रकाश पर्व दीपावली के पावन अवसर पर वोकल फॉर लोकल और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शनिवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन नौगढ़ विकासखंड के ग्राम धेंसा नानकार पहुंचे।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

सिद्धार्थनगर जनपद में प्रकाश पर्व दीपावली के पावन अवसर पर वोकल फॉर लोकल और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शनिवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन नौगढ़ विकासखंड के ग्राम धेंसा नानकार पहुंचे। डीएम ने स्वयं कुम्हार लवकुश प्रजापति के घर जाकर चौमुखी, मैजिक और पारंपरिक मिट्टी के दीयों की खरीदारी की और आम जनमानस को पर्यावरण संरक्षण व स्थानीय कारीगरों के आर्थिक उत्थान का सशक्त संदेश दिया।

इलेक्ट्रिक चाक पर खुद आजमाए हाथ, समझी माटी कला की बारीकियां

भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने गांव में स्थापित मिट्टी उत्पाद निर्माण इकाई का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम शिवशरणप्पा जीएन स्वयं इलेक्ट्रिक चाक पर बैठे और अपने हाथों से मिट्टी को आकार देकर दीया तैयार किया। उन्होंने माटी कला की पारंपरिक व आधुनिक तकनीकों को समझा और कारीगरों के हुनर की मुक्तकंठ से सराहना की।

मिट्टी के दीये खरीदें, स्थानीय शिल्पकारों को सशक्त बनाएं’: डीएम

जिलाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि दीपावली पर मिट्टी के पारंपरिक दीयों का ही उपयोग करें। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि स्थानीय कारीगरों, कुम्हारों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष रोजगार व संबल मिलेगा। उन्होंने कारीगर लवकुश से मिट्टी की उपलब्धता, कच्चा माल लाने में आने वाली समस्याओं, लागत और बाजार व्यवस्था को लेकर विस्तृत संवाद किया।

मौके पर मौजूद जिला ग्रामोद्योग अधिकारी गंगाधर दूबे को जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश दिए कि माटी कला बोर्ड की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार, प्रदर्शनियों में स्थान और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

मुंबई में 18 साल हुनर तराशा, फिर गांव लौटकर पैतृक कारोबार को दी नई उड़ान

धेंसा नानकार निवासी 39 वर्षीय लवकुश प्रजापति (पुत्र स्वर्गीय बुद्धिराम प्रजापति) ने बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन, दीये और घड़े बनाने का काम करता आ रहा है। जब पारंपरिक काम में मंदी आने लगी, तो उन्होंने मुंबई का रुख किया और वहां 18 वर्षों तक आधुनिक पॉटरी, फैंसी दीये, डिजाइनर कुल्हड़ और टेराकोटा उत्पाद बनाने का गहन प्रशिक्षण लिया।

इसके बाद वे अपनी माटी और गांव वापस लौटे और अपने भाइयों व परिवार के सहयोग से पैतृक व्यवसाय को नए स्वरूप में स्थापित करते हुए एक आधुनिक मिट्टी उत्पाद निर्माण इकाई शुरू की। डीएम के उनके घर पहुंचकर हौसला अफजाई करने और दीये खरीदने पर लवकुश व उनके पूरे परिवार ने खुशी और आभार व्यक्त किया।

Voice Of News 24

 

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