नई दिल्ली

नई दिल्ली शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर कन्या पूजन कंजक पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी-छोटी कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर श्रद्धा और सम्मान के साथ भोजन कराने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

नई दिल्ली शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर कन्या पूजन कंजक पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी-छोटी कन्याओं को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर श्रद्धा और सम्मान के साथ भोजन कराने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्र का व्रत अधूरा रहता है। पुराणों के अनुसार, बाल्यावस्था छल-कपट और बुराइयों से दूर होती है, इसलिए बच्चों के निर्मल मन में साक्षात देवी की ऊर्जा निवास करती है।
कन्या पूजन से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र माता दुर्गा को प्रसन्न करना चाहते थे। अपनी इस इच्छा को लेकर वे भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और माता को प्रसन्न करने का उपाय पूछा। तब ब्रह्मा जी ने उन्हें विधि-विधान से कुंवारी कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराने की सलाह दी। ब्रह्मा जी के बताए अनुसार इंद्रदेव ने कन्या पूजन किया, जिससे माता प्रसन्न हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। माना जाता है कि तभी से सनातन परंपरा में कन्या पूजन की शुरुआत हुई।
पूजन से जुड़ी मुख्य बातें
स्वरूप: कन्या पूजन में 9 कन्याओं को माता दुर्गा के नौ स्वरूपों और एक बटुक (बालक) को भगवान भैरव का रूप माना जाता है। यदि 9 कन्याएं न मिल पाएं, तो 3, 5 या 7 कन्याओं के साथ भी पूजन किया जा सकता है।
भोग
कन्याओं को सूजी का हलवा, काले चने, पूड़ी, खीर और आलू की रसेदार सब्जी का भोजन कराया जाता है।
विदाई
भोजन के बाद कन्याओं को केला, सेब, नारियल, अन्य मौसमी फल, मिठाई, दक्षिणा और उपहार देकर विदा किया जाता है। विदाई से पहले सभी कन्याओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।
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