‘उड़ता तीर’ फिल्म समीक्षा: जब पाकिस्तानी एजेंट को खुद पर हुआ भारतीय होने का भरोसा

मनोरंजन

आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘उड़ता तीर’ जासूसी, देशभक्ति और गलत पहचान पर आधारित एक कॉमेडी फिल्म है। फिल्म का मुख्य विचार काफी अनोखा है, लेकिन धीमी शुरुआत और कमजोर पटकथा के कारण यह मनोरंजन के बावजूद थोड़ी अधूरी महसूस होती है।पूरी जानकारी के लिए पढ़िए वाॅइस ऑफ़ न्यूज़ 24 की खास रिपोर्ट।

 

आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘उड़ता तीर’ जासूसी, देशभक्ति और गलत पहचान पर आधारित एक कॉमेडी फिल्म है। फिल्म का मुख्य विचार काफी अनोखा है, लेकिन धीमी शुरुआत और कमजोर पटकथा के कारण यह मनोरंजन के बावजूद थोड़ी अधूरी महसूस होती है।

कहानी और प्लॉट

आकाश ए कौशिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी अजहर मकसूद (मुकुल देव) और उसके भारत विरोधी मंसूबों से शुरू होती है। इसके बाद कश्मीर के बारामूला में भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड से जुड़े विक्रांत थापर आयुष्मान खुराना की एंट्री होती है।

कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब पता चलता है कि विक्रांत असल में बिलाल नाम का एक पाकिस्तानी एजेंट है, जो भारत में मिशन पर था। लेकिन, एक हादसे या घटना के बाद उसकी याददाश्त चली जाती है और वह खुद को एक सच्चा भारतीय अधिकारी समझने लगता है। अपनी बदली हुई सोच के साथ वह पूरी ईमानदारी से उसी व्यवस्था की रक्षा में जुट जाता है, जिसके खिलाफ उसे काम करना था। इसी पहचान के संकट और उलझन से फिल्म का मुख्य हास्य  पैदा होता है।

अभिनय

आयुष्मान खुराना: उन्होंने दो अलग-अलग पहचानों के बीच फंसे किरदार को बहुत सहजता से निभाया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग उन दृश्यों में कमाल करती है, जहां वे अपने व्यवहार को सामान्य मानते हैं जबकि बाकी लोग परेशान रहते हैं।

राहुल बोस: फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज राहुल बोस CTS प्रमुख वर्मन हैं। गंभीर अधिकारी की छवि के बीच उनका शांत और संतुलित हास्य दृश्यों को बेहद यादगार बना देता है।

सुहैल नैय्यर और मुकुल देव सुहैल अशफाक के रूप में ने आयुष्मान का अच्छा साथ दिया है, वहीं मुकुल देव ने भी अपने छोटे लेकिन प्रभावी हिस्से में बेहतरीन काम किया है।

फिल्म के मजबूत पहलू (क्या काम करता है?
सिचुएशनल ह्यूमर: फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका परिस्थिति जन्य हास्य है। सनी देओल की फिल्मों और ‘तारा सिंह-अशरफ अली’ के संदर्भों का इस्तेमाल कहानी की विडंबना को और मजेदार बनाता है।

गंभीरता से बचाव

देशभक्ति और जासूसी जैसे गंभीर विषयों पर हर समय लंबे-चौड़े भाषण देने के बजाय, फिल्म ने गलतफहमियों और किरदारों के आपसी टकराव से हंसाने की कोशिश की है।

कमजोर पक्ष क्या नहीं कर पाया प्रभावित?
धीमी रफ्तार फिल्म की शुरुआत काफी धीमी है। पहले आधे घंटे में कहानी और किरदारों को स्थापित करने में बहुत समय लग जाता है, जिससे इसकी रफ्तार सुस्त हो जाती है।

कमजोर पटकथा

आयुष्मान और सारा अली खान यामिनी के बीच के पारिवारिक और रोमांटिक रिश्ते को कहानी में ठीक से जगह नहीं मिली, जिससे भावनात्मक जुड़ाव कमजोर पड़ जाता है। संपादन में अगर थोड़ी और कसावट होती, तो फिल्म का प्रभाव और बेहतर होता।

निष्कर्ष

‘उड़ता तीर’ एक दिलचस्प और अलग विचार पर बनी फिल्म है, जो अपने अनोखे हास्य और बेहतरीन अभिनय (विशेषकर आयुष्मान और राहुल बोस) के दम पर आपका मनोरंजन करती है। अगर आप जासूसी के साथ हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

 

 

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